मुख्य गवाह अदालत में इंडो कैनेडियन बस ड्राइवर के खिलाफ साबित नहीं कर पाया आरोप

मोहाली,2 फरवरी (Geenews network) वर्ष 2018 में सेक्टर-71 में हुए एक सडक़ हादसे में दर्ज मामले की सुनवाई जिला अदालत में हुई। अदालत में दोनों पक्षों ने अपनी दलीलें रखी, जिस पर फैसला सुनाते हुए अदालत ने मामले में नामजद आरोपी (इंडो कैनेडियन बस ड्राइवर)पटियाला के गुरप्रीत सिंह को उसके खिलाफ आरोप तय ना होने के चलते उसे बरी कर दिया।  अदालत में मुख्य गवाह यह साबित नहीं कर पाया कि उसनेे चालक या अपराधी को वाहन चलाते देखा था। अदालत ने कहा कि यह अत्यधिक असंभव है कि उसने चालक को देखा। ऐसा इसलिए है क्योंकि बेशक पीडित कार चला रहा था और दुर्घटना के समय वह मानसिक रूप से परेशान था। ऐसे में यह विश्वास नहीं किया जा सकता कि उसने अपराधी वाहन के चालक को देखा। वहीं मैकेनिक जिसने वाहन ठीक किया की रिपोर्ट केवल कागजी औपचारिकता मात्र थी। उसमें केवल नुकसान की बात की गई थी। शिकायतकर्ता की गवाही में वाहनों को हुए नुकसान का कहीं भी उल्लेख नहीं था। यह पता लगाने के लिए कि क्या उक्त नुकसान कथित तरीके से हुआ है। वहीं, इस तथ्य के संबंध में कोई निष्कर्ष नहीं मिला कि क्या कार को हुआ नुकसान 80-90 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलाई जा रही बस के कारण हुआ था। आरोप साबित करने के लिए ये सभी तथ्य महत्वपूर्ण थे कि बस को कथित रूप से तेज और लापरवाही से चलाया जा रहा था। अभियोजन पक्ष के अनुसार घायलों को पहले मोहाली के फेज-6 अस्पताल ले जाया गया और वहां से जीएमसीएच सेक्टर 32 चंडीगढ़ और अंत में पटियाला के एक निजी अस्पताल में भर्ती किया गया। अभियोजन पक्ष मोहाली या चंडीगढ़ के अस्पताल द्वारा तैयार किए गए किसी भी मेडिकल रिकॉर्ड को रिकॉर्ड में पेश करने में विफल रहा।  यहां तक कि कार में बैठे अन्य व्यक्तियों का कोई मेडिकल रिकॉर्ड भी नहीं है और जो एकमात्र मेडिकल पेश किया गया है वह मंदीप कुमार का है। डॉक्टर से पूछताछ की गई और उनके अनुसार मंदीप कुमार को उनकी पत्नी ने भर्ती कराया था। यह तथ्य अभियोजन पक्ष की कहानी के भी विपरीत है, जिसके अनुसार घायलों को या तो राहगीरों या एम्बुलेंस द्वारा अस्पताल ले जाया गया था।
अदालत ने कहा कि बाकी सभी गवाह औपचारिक गवाह हैं और कहीं भी आरोपी को कथित घटना से नहीं जोड़ते । न ही यह साबित करते हैं कि अपराधी वाहन को तेज और लापरवाही से चलाया जा रहा था। इस प्रकार अदालत का मानना है कि अभियोजन पक्ष आरोपी के अपराध को साबित करने में विफल रहा है इसलिए उसे आरोपों से बरी किया जाता है।
बता दें कि गुरप्रीत सिंह के खिलाफ मटौर थाने में वर्ष 2018 में आईपीसी की धारा 279, 338 और 427 के तहत मामला दर्ज हुआ था। दरअसल, 26 अगस्त 2018 को पीसीएल लाइट प्वाइंट (सेक्टर-71)में इनोवा और इंडो कैनेडियन बस की टक्कर हुई थी। जांच अधिकारी एएसआई बलजिंदर सिंह मंड मटौर थाने से घटना स्थल पर पहुंचे। घायलों ने बताया कि बस ड्राइवर की रफ्तार काफी तेज थी, जिस कारण बयान दर्ज करने उपरांत ड्राइवर पर मामला दर्ज हुआ था। यह मामला अदालत में विचाराधीन था।

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