सीबीआई कोर्ट ने 32 साल पुराने मामले में सुनाया फैसला, दोषी को 23 दिसंबर को सुनाई जाएगी सजा

दोषी पूर्व एसएचओ जसंवत सिंह खालड़ा कत्ल केस में पहले ही उम्र कैद की काट रहा सजा

मोहाली,18 दिसंबर (Geenews Network) सीबीआई कोर्ट मोहाली में 32 साल पुराने अपहरण, अवैध कारावास और लापता होने के मामले की सुनवाई हुई। विशेष जज मनजोत कौर की अदालत ने आज पूर्व एसएचओ सुरिंदरपाल सिंह सहित दो आरोपियों को दोषी करार दिया है। हालांकि एक आरोपी एएसआई अवतार सिंह की ट्रॉयल दौरान मौत हो चुकी है। दोषी सुरिंदरपाल सिंह को 23 दिसंबर को सजा सुनाई जाएगी। दोषी सुरिंदरपाल सिंह जोकि जेल में बंद है को वीडियो कॉन्फ्रैंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया। बता दें कि दोषी सुरिंदरपाल सिंह जोकि तत्कालीन एसएचओ था जसंवत सिंह खालड़ा कत्ल केस में पहले ही उम्र कैद की सजा काट रहा है। उसको तरनतारन के गांव जिओबाला के चार परिवारिक मैंबर को अगवा करके लापता करने के एक अन्य केस में भी 10 साल की सजा सुनाई गई है।अदालत ने थाना सरहाली जिला तरनतारन के उस समय के एसएचओ सुरिंदरपाल सिंह को धारा 120बी, 342, 364, 365 में दोषी ऐलान किया है। आरोप है कि 31 अक्टूबर 1992 की शाम को सुखदेव सिंह वाइस प्रिंसिपल और उसके 80 वर्षीय ससुर सुल्लखन सिंह (स्वतंत्रता सैनानी निवासी भकना) को एएसआई अवतार ङ्क्षसह के नेतृत्व में पुलिस पार्टी ने हिरासत में लिया था। अवतार ङ्क्षसह ने परिवार वालों को सूचना दी थी कि सुखदेव ङ्क्षसह और सुल्लखन सिंह को एसएचओ सुरिंदरपाल सिंह ने पूछताछ के लिए बुलाया है। फिर दोनों को तीन दिन तक पुलिस थाना सरहाली तरनतारन में अवैध तरीके से रखा गया, जहां परिवार और अध्यापक यूनियन के मैंबर उनको मिले। मैंबरों ने उन्हें खाना, कपड़े मुहैया करवाए, पर उसके बाद उनका कोई पता नहीं लगा।
इस मामले में सुखदेव सिंह की पत्नी सुखवंत कौर ने पुलिस के उच्चाधिकारियों को शिकायत की थी सुखदेव सिंह और सुल्लखन सिंह को अपराधिक मामलों में फंसाया गया है, पर कोई फायदा नहीं हुआ। उस समय सुखदेव सिंह सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल लोपोके जिला अमृतसर के लैक्चरार-वाइस प्रिंसिपल के तौर पर सेवाएं निभा रहे थे और उनके ससुर सुल्लखन सिंह आजादी घुलाटिए। वह आजादी की लहर के दौरान बाबा सोहन सिंह भकना के नजदीकी साथियों में एक थे। उन्होंने उसके साथ जेल भी काटी थी। इस मामले में पूर्व विधायक सतपाल डांग और विमला डांग ने भी तत्काली मुख्यमंत्री पंजाब बेअंत सिंह को अलग-अलग पत्र लिखे और मुख्यमंत्री ने भी जवाब दिया कि वह पुलिस की हिरासत में नहीं है। वर्ष 2003 में कुछ पुलिस मुलाजिमों ने सुखवंत कौर (सुखदेव सिंह की पत्नी)के साथ संपर्क किया और उसके खाली कागज पर हस्ताक्षर करवा लिए। कुछ दिन बाद उसको सुखदेव सिंह की मौत का सर्टीफिकेट सौंपा गया, जिसमें 8 जुलाई 1993 को उसकी मौत होने का जिक्र किया गया था।
परिवार को सूचित किया गया कि टॉर्चर दौरान सुखदेव सिंह की मौत हो गई और उसकी लाश सुल्लखन सिंह सहित हरीके नहर में फेंक दी गई। सुखवंत कौर द्वारा अपने पति और पिता को जबरन उठाने, गैर कानूनी तौर पर हिरासत में रखने और फिर लापता होने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट का रूख करना पड़ा। नवंबर 1995 में एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को बड़े स्तर पर मृतकों के संस्कार के मामले की जंाच करने के निर्देश दिए। मानवीय अधिकार कारकून जसवंत सिंह खालड़ा ने पंजाब पुलिस की ओर से लाशों को लावारिस बताकर संस्कार करने का खुलासा किया था।
पूछताछ के दौरान सीबीआई ने 20 नवंबर 1996 को सुखवंत कौर के बयान दर्ज किए और उसके बयान के आधार पर 6 मार्च 1997 को एएसआई अवतार सिंह, एसआई सुरिंदरपाल सिंह तत्कालीन एसएचओ सरहाली और अन्य के खिलाफ धारा 364/34 के तहत मामला दर्ज किया और वर्ष 2000 में सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट दायर की। जिसको सीबीआई कोर्ट पटियाला ने वर्ष 2002 में रद्द कर दिया और अगली जांच के निर्देश दिए। वर्ष 2009 में सीबीआई ने सुरिंदरपाल और अवतार सिंह के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दायर की। वर्ष 2016 में सीबीआई अदालत पटियाला की ओर से धारा 120बी, 342, 364, 365 के तहत आरोप तय किए गए।

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