मोहाली 21 मई (Geenews Network)पंजाब सतर्कता ब्यूरो द्वारा राज्य को रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार से मुक्त करने के लिए एक अभियान शुरू किया गया है। जिससे पंजाब के कई चर्चित मामलों की भी विजिलेंस द्वारा जांच की जा रही है। इस भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के तहत कई पूर्व मंत्री और विधायक भी विजिलेंस के रडार पर हैं, जिसके तहत जांच जारी है.अब पंजाब सरकार ने पर्ल ग्रुप फ्रॉड मामले की जांच विजिलेंस को सौंप दी है। पंजाब सरकार ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। फिरोजपुर और मोहाली में हुए घोटालों के संबंध में दर्ज दो अलग-अलग प्राथमिकियों की अब विजिलेंस जांच करेगी। फिरोजपुर थाना जीरा में पर्ल ग्रुप घोटाले से संबंधित 2020 की एफआईआर संख्या 79 और राज्य अपराध थाना एसएएस नगर (मोहाली) में 2023 की एफआईआर 1 की जांच अब विजिलेंस को सौंप दी गई है.
पर्ल्स ने किया था लगभग 60,000 करोड़ का घोटाला
लगभग 60,000 करोड़ रुपये जुटने वाली पर्ल्स एग्रो कारपोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) जिसे पर्ल्स ग्रुप के नाम से जाना जाता है, ने पंजाब सहित देशभर में पांच करोड़ आम लोगों से खेती और रियल एस्टेट जैसे कारोबार से ये रकम जुटाई । कंपनी ने यह निवेश 18 सालों में गैर कानूनी तरीके से हासिल किया। जब लौटाने की बारी आई तो कंपनी पीछे हटने लगी। तब इस मामले में सेबी ने दखल दिया था और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। इस कंपनी के निवेशक लंबे समय से अपना पैसा वापिस पाने का इंतजार कर रहे हैं। मामले की सीबीआई जांच भी जारी है और सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए जस्टिस आरएम लोढ़ा की अगुवाई में कमेटी का गठन किया, जिसके समक्ष जांच के दौरान डेढ़ करोड़ लोगों ने रिफंड क्लेम भी पेश किए। 2016 में गठित जस्टिस लोढ़ा कमेटी ने पीएसीएल और उससे जुड़ी संस्थाओं की संपत्तियों को बेचकर 878.20 करोड़ रुपये रिकवर कर लिए हैं।

