मोहाली की सीबीआई कोर्ट का फैंसला

2 नवंबर को सुनाई जाएगी सजा

केस के ट्रायल दौरान दो आरोपियों की हो चुकी है मौत

मोहाली 27 अक्तूबर(Geenews Network) -सीबीआई कोर्ट मोहाली ने वर्ष 1993 के एक फर्जी एनकाउंटर मामले में पंजाब पुलिस के दो रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों शमशेर सिंह (तत्कालीन सब इंस्पेक्टर) व जगतार सिंह (तत्कालीन एएसआई) को दोषी करार दिया है। हालांकि केस के ट्रायल दौरान दो आरोपियों पूर्ण सिंह (तत्कालीन एसएचओ) व जगीर सिंह (तत्कालीन एएसआई) की मौत हो चुकी है। मामले की सुनवाई वीरवार को सीबीआई कोर्ट हरिंदर सिद्धू की अदालत में हुई। दोषी करार होने के बाद अब अदालत आरोपियों को 2 नवंबर को सजा सुनाएगी। सीबीआई अदालत ने तरनतारन के 29 वर्ष पुराने पुलिस मुकाबले पर फैसला सुनाया , जिसमें हरबंस सिंह निवासी गांव ऊबोके (तरनतारन) व अज्ञात आतंकवादी को पुलिस की मुठभेड़ दौरान मारा हुआ दिखाया गया था। निचली अदालत में यह पुलिस मुकाबला झूठा साबित हुआ और अदालत ने आरोपितों को दोषी ठहराया। शमशेर सिंह व जगतार सिंह को आइपीसी की धारा 302, 218 व 120बी के तहत अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया था। पुलिस की कहानी में आतंकवादी हमले दौरान हुई थी हरबंस की मौत जिक्रयोग है कि पुलिस की कहानी अनुसार 15 अप्रैल 1993 को थाना सदर तरनतारन की पुलिस ने दावा किया था कि सुबह साढ़े 4 बजे तीन आतंकवादियों ने उनकी पुलिस पार्टी पर उस समय हमला कर दिया था जब हरबंस सिंह को हिरासत में लेकर जा रहे थे। चंबल ड्रेन क्षेत्र के खुलासे अनुसार हथियार व गोला बारूद व क्रास फायरिंग दौरान हरबंस सिंह व एक आतंकवादी की मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने 15 अप्रैल 1993 को थाना सदर तरनतारन में अज्ञात आतंकवादियों के खिलाफ आइपीसी की धारा 302, 307, 34 , आम्र्स एक्ट व टाडा एक्ट की धारा (5) के तहत मामला दर्ज किया था।सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर शुरु हुई थी सीबीआई जांच इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर सीबीआई ने हरबंस सिंह के भाई परमजीत सिंह की शिकायत पर जांच शुरु की थी । जांच में मुकाबले की कहानी संदिग्ध पाई गई और फिर जांच के आधार पर 25 जनवरी 1999 को केस दर्ज किया गया। पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आइपीसी की धारा 302, 364 व 34 के तहत सीबीआई ने मामला दर्ज किया। इस मामले में 8 जनवरी 2002 को आरोपी तत्कालीन एसएचओ तरनतारन पूर्ण सिंह, सब इंस्पेक्टर शमशेर सिंह, एएसआई जगीर सिंह व एएसआई जगतार सिंह के खिलाफ सजा योग अपराध के लिए अदालत में चार्जशीट दायर की थी। 13 दिसंबर 2002 को सीबीआई अदालत ने उनके विरुद्ध चार्ज फ्रेम किया था लेकिन उच्च अदालत के निर्देशों पर वर्ष 2006 से 2022 तक मामले की सुनवाई रूकी रही जिस दौरान आरोपित पूर्ण सिंह व जगीर सिंह की मौत हो गई। इस केस में 17 गवाहों ने ट्रायल कोर्ट में अपने बयान दर्ज करवाए और आखिरकार करीब 29 साल बाद केस का फैसला सुनाया गया।

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