केस का चालान संबंधित अधिकारी से मंजूरी के लिए लंबित, पुलिस ने मांगा 20 दिन का समय
मोहाली,5 नवंबर ( Geenews network)कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के भाई व अन्य गैंग मैंबरों के जाली पासपोर्ट बनाकर विदेश भेजने के मामले की सुनवाई जिला अदालत में हुई। आज सुनवाई दौरान गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को मोहाली कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रैंसिंग से पेश किया गया। पिछली सुनवाई पर गैंगस्टर जगदीप सिंह उर्फ जग्गू भगवानपुरिया, बूटा खां और दीपक टीनू को जेल अधिकारियों ने कोर्ट में पेश नहीं किया था। अदालत ने उक्त तीनों आरोपियों के प्रोडक्शन वारंट जारी कर तीनों को 5 नवंबर को वीडियो कॉन्फ्रैंसिंग के माध्यम से पेश होने के निर्देश दिए थे।
मामले में अभी तक चालान पेश नहीं किया गया है। आज सुनवाई दौरान आईओ एसआई अमनदीप सिंह अदालत में पेश हुए और उन्होंने अलग से बयान दिया है कि वे मौजूदा केस के आईओ हैं। मौजूदा केस का चालान संबंधित अधिकारी से मंजूरी के लिए लंबित है और इसे 20 दिनों की अवधि के भीतर पेश किया जाएगा। अदालत ने तर्क सुनने के बाद अनुमति दी। अदालत ने कहा कि चालान निर्धारित तिथि तक प्रतीक्षित रहेगा। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर निश्चित की गई है।
क्या था मामला
पंजाब स्टेट क्राइम पुलिस ने 20जून 2022 को गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई सहित कुल 10 लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 384, 465, 466, 468, 471, 120बी व पासपोर्ट एक्ट 12 व 25 के तहत मामला दर्ज किया था। लॉरेंस के अलावा इस मामले में गैंगस्टर कर्मवीर सिंह उर्फ कर्णवीर सिंह, सतविंदर सिंह उर्फ गोल्डी, सतवीर वडिंग उर्फ सैम, अनमोल बिश्नोई, सचिन थापन, राजवीर सिंह उर्फ रवि राजगढ़, यादविंदर सिंह उर्फ चांदी, बलदेव चौधरी उर्फ बल्लू उर्फ काकू, गुरिंदरपाल सिंह उर्फ गोरा व अज्ञात शामिल थे। इन पर आरोप था कि गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई जो अलग-अलग मामलों में कैदी व हवालाती के तौर पर बंद हैं ने यूएसए में बैठे अपने साथी कर्मवीर सिंह उर्फ कर्णवीर ङ्क्षसह, कनाडा बैठे सतविंदर सिंह उर्फ गोल्डी व सतवीर वडिंग उर्फ सैम का अपने भाई अनमोल बिश्नोई को जाली पासपोर्ट पर विदेश भेजने में मदद ली। उसने अपने क्रिमिनल गैंग में शामिल अन्य साथियों व रिश्तेदारों के पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान स्टेटों के अवैध ट्रैवल एजेंटों से जाली पासपोर्ट बनवाए। इस काम के लिए उन्हें मोटी रकम दी। लॉरेंस ने अपने भाई अनमोल बिश्नोई व रिश्तेदार सचिन थापर के जाली नाम व एड्रेस पर उनकी असल फोटो वाले भारती पासपोर्ट बनाकर उन्हें संगीन अपराधों में गिरफ्तारी से बचाने के लिए उन्हें अवैध तरीके से विदेश भेजा था और उक्त लोगों ने उसकी मदद की थी।
